एजिंग प्रभाव (Aging Effect)
उम्र बढ़ना (Aging) जीवन की एक प्राकृतिक, जैविक और अपरिहार्य प्रक्रिया है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर के सभी अंगों के साथ‑साथ त्वचा (Skin) में भी कई संरचनात्मक, रासायनिक और कार्यात्मक बदलाव होते हैं। त्वचा न केवल हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है, बल्कि यह उम्र बढ़ने के प्रभावों को सबसे पहले और सबसे स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
यह लेख विशेष रूप से सहेली ज्ञान जैसे महिला‑केंद्रित ज्ञान मंच के लिए तैयार किया गया है, जिसमें उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक, मेडिकल और त्वचा‑विशेषज्ञ (Dermatology) दृष्टिकोण से समझाया गया है।
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया (Aging Process) क्या है?
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया वह जैविक क्रम है, जिसमें समय के साथ‑साथ शरीर की कोशिकाओं (Cells) की मरम्मत क्षमता कम होती जाती है, नई कोशिकाओं का निर्माण धीमा हो जाता है और पुराने ऊतक धीरे‑धीरे कमजोर होने लगते हैं।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार Aging को दो भागों में बाँटा जाता है:
1. Intrinsic Aging (आंतरिक उम्र बढ़ना)
यह उम्र बढ़ने की वह प्रक्रिया है जो:
- जन्म से शुरू होती है
- जेनेटिक्स (Genes) पर निर्भर होती है
- हार्मोनल बदलावों से जुड़ी होती है
- प्राकृतिक रूप से होती है
2. Extrinsic Aging (बाहरी कारणों से उम्र बढ़ना)
यह Aging बाहरी कारकों के कारण तेज हो जाती है, जैसे:
- सूरज की UV किरणें (Photoaging)
- प्रदूषण
- धूम्रपान और शराब
- गलत खान‑पान
- नींद की कमी
- तनाव (Stress)
👉 मेडिकल रिसर्च के अनुसार त्वचा पर दिखने वाले उम्र बढ़ने के 80% संकेत बाहरी कारणों से होते हैं।
त्वचा की संरचना (Structure of Skin) – Aging समझने से पहले
त्वचा की Aging को समझने के लिए पहले उसकी संरचना जानना जरूरी है:
त्वचा की तीन परतें:
- Epidermis (ऊपरी परत) – त्वचा की सुरक्षा परत
- Dermis (मध्य परत) – कोलेजन, इलास्टिन, ब्लड वेसल्स
- Hypodermis (निचली परत) – फैट और इंसुलेशन
Aging के दौरान सबसे ज्यादा बदलाव Dermis में होते हैं, क्योंकि यहीं से त्वचा की मजबूती और लचीलापन आता है।
उम्र बढ़ने से त्वचा पर होने वाले प्रमुख प्रभाव
1. कोलेजन (Collagen) की कमी
25 वर्ष की उम्र के बाद हर साल लगभग 1% कोलेजन कम होने लगता है।
कोलेजन की कमी से:
- त्वचा ढीली होने लगती है
- झुर्रियाँ (Wrinkles) बनती हैं
- त्वचा पतली और कमजोर हो जाती है
👉 कोलेजन क्या है और यह त्वचा के लिए क्यों जरूरी है

2. इलास्टिन (Elastin) का टूटना
इलास्टिन त्वचा को खिंचने और वापस अपनी जगह आने की क्षमता देता है। Aging के साथ:
- इलास्टिन फाइबर टूटने लगते हैं
- त्वचा में ढीलापन आता है
- Jawline और गाल लटकने लगते हैं
👉 त्वचा का लचीलापन कैसे बनाए रखें
3. सेल रिन्यूअल (Cell Renewal) धीमा होना
युवा त्वचा में:
- 28 दिन में नई कोशिकाएँ बनती हैं
Aging त्वचा में:
- यह प्रक्रिया 40–60 दिन तक हो सकती है
परिणाम:
- त्वचा बेजान दिखती है
- डलनेस
- दाग‑धब्बे देर से ठीक होते हैं
4. नमी (Moisture) की कमी और ड्रायनेस
उम्र बढ़ने पर:
- Sebaceous glands कम तेल बनाती हैं
- Hyaluronic Acid कम होता है
इससे:
- त्वचा रूखी
- खुजली
- Fine lines ज्यादा दिखती हैं
👉 ड्राय स्किन के कारण और समाधान

5. झुर्रियाँ (Wrinkles) और फाइन लाइन्स
Wrinkles के प्रकार:
- Dynamic wrinkles (मुस्कान, माथा)
- Static wrinkles (स्थायी)
मुख्य कारण:
- कोलेजन की कमी
- UV Damage
- मसल मूवमेंट
6. पिगमेंटेशन और एज स्पॉट्स
Aging के साथ मेलानोसाइट्स अनियमित हो जाते हैं:
- Age spots
- Sun spots
- Uneven skin tone
👉 चेहरे पर काले धब्बे क्यों होते हैं
7. त्वचा पतली और संवेदनशील होना
Dermis पतली होने से:
- Bruising जल्दी
- एलर्जी का खतरा
- घाव देर से भरते हैं
हार्मोनल बदलाव और त्वचा Aging
महिलाओं में:
- Estrogen कम होने से त्वचा ड्राय
- Menopause के बाद तेजी से Aging
पुरुषों में:
- Testosterone धीरे‑धीरे घटता है
👉 हार्मोन और त्वचा का संबंध
Photoaging: सूरज की किरणों से उम्र बढ़ना
UV Rays:
- DNA Damage
- Collagen breakdown
- Free radicals
यही कारण है कि:
- SPF न लगाने वाली त्वचा जल्दी बूढ़ी दिखती है
👉 सनस्क्रीन क्यों जरूरी है

Free Radicals और Oxidative Stress
Free radicals:
- कोशिकाओं को नुकसान
- Aging को तेज
Antioxidants की भूमिका:
- Vitamin C
- Vitamin E
- Polyphenols
👉 एंटीऑक्सीडेंट्स और त्वचा
उम्र बढ़ने की प्रक्रिया क्या रोकी जा सकती है?
पूरी तरह नहीं, लेकिन धीमी जरूर की जा सकती है:
- संतुलित आहार
- पर्याप्त नींद
- सनस्क्रीन
- स्किनकेयर रूटीन
- तनाव नियंत्रण
👉 एंटी‑एजिंग स्किनकेयर रूटीन
निष्कर्ष
उम्र बढ़ना कोई बीमारी नहीं बल्कि जीवन का स्वाभाविक चरण है। सही जानकारी, वैज्ञानिक समझ और सही देखभाल से हम त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक, स्वस्थ और सुंदर बना सकते हैं।
सहेली ज्ञान का उद्देश्य यही है कि महिलाएँ अपनी त्वचा और शरीर को समझें, डरें नहीं, बल्कि जागरूक बनें।
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